जो शास्त्रों में श्रद्धा नहीं रखता, वह वैद्य होकर भी न धर्म जानता है, न वेदांग, न तंत्र, और न ही सुश्रुत संहिता जैसे महान ग्रंथों की मूल भावना। भारत की सनातन परंपरा में आयुर्वेद केवल रोग निवारण का माध्यम नहीं, अपितु स्वस्थ जीवन की संपूर्ण कला है। यह शरीर, मन, आत्मा और प्रकृति के मध्य संतुलन स्थापित करने का शास्त्र है। इस गौरवशाली परंपरा को समर्पित यह पुस्तक-श्लोकधारा, डॉ. साक्षी अवस्थी एवं डॉ रमनदीप कौर के गहन अध्ययन, अध्यात्मिक अंतर्दृष्टि तथा शास्त्रनिष्ठ दृष्टिकोण का प्रतिफल है। उन्होंने आयुर्वेद के दार्शनिक मूल्यों को अत्यंत सुगम व स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक न केवल आयुर्वेदिक छात्रों के लिए अमूल्य संदर्भ सामग्री है, बल्कि एक प्रेरणादायक ग्रंथ भी है।
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वैद्य साक्षी अवस्थी (एम.डी.)
(आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत) असिस्टन्ट प्रोफेसर, संहिता संस्कृत एवं सिद्धांत विभाग अवस्थी आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय (नालागढ़ , हिमाचल प्रदेश)
वैद्य रमनदीप कौर (एम.डी.)
(आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत) असिस्टन्ट प्रोफेसर, संहिता संस्कृत एवं सिद्धांत विभाग शिव शक्ति आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय (मानसा, पंजाब )
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