जुलाई का महीना था, उस दिन राजीव अपने घर पे सो रहा था। दिन के लगभग 4 बज रहे थे। तभी उसके मोबाइल पे नोटिफ़िकेशन की रिंग बजी, वो नींद से उठा और मोबाइल में आये हुए मैसेज को पढ़ने लगा। मैसेज पढ़ने के बाद मोबाइल को वही बिस्तर पर फेंक कर बाथरूम की तरफ फ्रेश होने चला गया। मुँह को पानी से धोया और तौलिये से पोंछते हुए आईने की तरफ़ देखने लगा। खिड़की के पास आके देखा तो बाहर का मौसम बड़ा सुहाना लग रहा था। और मौसम सुहाना हो भी क्यों न, बारिश के बाद धूप जो खिली थी। आसमान एकदम साफ़ और नीला दिखाई दे रहा था।
Raat Ka Musafir
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