यह संग्रह उन जज़्बातों का दस्तावेज़ है, जो अक्सर कहे नहीं जाते — बस महसूस होते हैं। हर कविता एक आईना है — कभी समाज का, कभी आत्मा का। सच और फ़साने के बीच की वो महीन रेखा जहाँ पाठक ठहर कर सोचने पर मजबूर होता है, वही इस किताब की असली ज़मीन है।
Numaish Jazbaaton Ki
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