इस संग्रह की कविताएँ मन में उठती जिज्ञासा और वहीं पार्श्व में पनपती आशा के संग मेरी यात्रा का दूसरा चरण हैं। इनमें अपनी चेतना की सीमा को छूने, कभी-कभी उसके पार जा कर देखने और लौट कर मन के केन्द्र बिंदु पर आ सिमटने के अनुभवों को रेखांकित करने का प्रयास है। संग ही सहज उल्लास, संवेदना की सूक्ष्मता, अदम्य जिजीविषा से मेरा साक्षात्कार भी है।
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बिनोद कुमार दास का जन्म बिहार के मधुबनी जिला में काको नाम के गाँव में हुआ। प्राथमिक शिक्षा वहीं हुई। मैट्रिक और इंटर की पढाई दरभंगा से हुई। आगे उन्होने आई. आई. टी. खड़गपुर (IIT Kharagpur) से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद उन्होने जमशेदपुर में टाटा स्टील को ज्वाइन किया। वहां अड़तीस साल तक सेवारत रहने के बाद वाइस प्रेसिडेंट के पद से सेवा निवृत हुए। उनका विवाह पूनम रानी दास के संग हुआ। उनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं। अभी वे जमशेदपुर में रह रहे हैं।
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