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किसी भी देश का लोकतांत्रिक होना सबसे उत्तम और महत्वपूर्ण माना जाता है। उस देश में जनता हमेशा ख़ुशहाल रहती है। लेकिन चंद लोग इस लोग इस लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के दुश्मन होते हैं। वे अपने निजी स्वार्थ और सत्ता पर काबिज़ रहने के लिए इस प्रक्रिया का गला घोंट देते। यही लोकतंत्र की haar होती है।

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बिमल तिवारी मूल रूप से जनपद देवरिया, उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। इन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से फ्रेंच भाषा मे स्नातक और डाॅ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी फैजाबाद से पर्यटन प्रशासन में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। इनके पिता स्व. दया शंकर तिवारी (सहा़ अध्यापक, जी. आर. बी. उ.मा. स्कूल उसका नोनापार, देवरिया) अध्यापक थे और श्रीमती कमलावती देवी हैं। लेखन में इन्हें कविता, कहानी, डायरी, यात्रा वृतांत लिखने का विशेष शौक है।

Loktantra Ki Haar

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