“कम में है ज़्यादा” दस हिंदी लघु-कथाओं का संकलन है और यह IIM बैंगलोर के एक प्रोफ़ेसर द्वारा लिखी गई पहली साहित्यिक कृति है। मानवीय अनुभवों और भावनाओं की गहन अभिव्यक्ति के साथ, प्रत्येक कहानी पाठकों को मानवता के सबसे बड़े संकट—पर्यावरण—पर गंभीर और कल्पनाशील चिंतन के लिए प्रेरित करती है। न्यूनतावाद, नदी पुनर्जीवन, जैव-विविधता संरक्षण, और जल सततता जैसे विषयों पर आधारित ये कहानियाँ मनोरंजक और रोचक होने के साथ-साथ पाठकों को विचार करने और सार्थक कदम उठाने के लिए भी प्रोत्साहित करती हैं।
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डॉ. आदित्य गुप्ता एक आपूर्ति शृंखला विशेषज्ञ, शिक्षक और संधारणीय विकास के प्रबल प्रवक्ता हैं। कॉर्पोरेट जगत में 23 वर्षों तक कार्य करने के पश्चात इन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मार्ग चुना। वर्तमान में आप भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर (IIM Bangalore) में सप्लाई चेन मैनेजमेंट सेंटर और सप्लाई चेन संधारणीयता लैब का नेतृत्व करते हुए संधारणीय आपूर्ति शृंखला, पर्यावरण संरक्षण और ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) विषयों का अध्यापन एवं अनुसंधान करते हैं। आप शैक्षणिक योग्यता से कंप्यूटर इंजीनियर, एमबीए और पीएचडी हैं। पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति गहरी संवेदनशीलता और प्रकृति-प्रेम से प्रेरित होकर डॉ. गुप्ता ने इस कहानी–संग्रह की रचना की है, जिसमें मानव जीवन, प्रकृति और आधुनिक चुनौतियों का संबंध सहज भाषा और प्रभावशाली कथानक के माध्यम से उभरता है। उनका मानना है कि कथा–साहित्य के माध्यम से पर्यावरण चेतना समाज के हर वर्ग तक अधिक सजीव और सरल तरीके से पहुँची जा सकती है। शिक्षा, शोध, सामाजिक योगदान और धरती के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए समर्पित डॉ. आदित्य निरंतर ऐसे प्रयासों में लगे हैं, जो व्यवसायों, नीति–निर्माताओं और आम नागरिकों को अधिक ज़िम्मेदारी, पारदर्शिता और संधारणीय सोच की ओर प्रेरित करें।
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