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पाँच जनवरी,1952 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के ग्राम - हाटा (बनुआडीह) में जन्म। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही। राष्ट्रीय कैडेट कोर के 'बी' प्रमाणपत्र के साथ कलकत्ता विवि से स्नातक एवं गोरखपुर विवि से एम• ए• (अर्थ•)। 1973 में विद्यार्थी-जीवन के अंत के साथ ही वैवाहिक जीवन प्रारंभ। 1974-76 में प्रतिष्ठित मिशनरी स्कूल एवं कालेज में अध्यापन तथा 1976-78 में महालेखाकार, नगालैंड कार्यालय में लेखापरीक्षक। 1978 से जनवरी,2012 तक पुनः केंद्र सरकार में वित्त मंत्रालय के केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग में अधिकारी रहा।

काव्यलेखन विद्यार्थी-जीवन से ही स्वांतः सुखाय जारी रहा। प्रथम रचना 'भगवान' 16 की उम्र में। पहले कभी प्रकाशन की नहीं सोची। रचनाएँ विभागीय पत्रिकाओं में छपती रहीं। सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र रूप से कविता एवं कहानी लेखन  । अन्य प्रकाशित पुस्तकें : जनभाषा की कविता-नगरी  (149 कविताएं), जनभाषा  कविता के द्वार  (188 कविताएँ ), हवा का रुख (कोरोना-पुराण सहित 145 हास्य प्रधान कविताओं का संग्रह) , 'कविताएं डाॅ• अंशु के साथ' का साझा कथा/संस्मरण  (प्रथम संकलन) तथा 'काव्य सरिता ' द्वारा संपादित साझा काव्य संकलन(द्वितीय  संस्करण) । एक अन्य काव्य संग्रह (जनभाषा कविता के गाँव) प्रकाशनाधीन।

काव्यलेखन की प्रथम प्रेरणा मुझे बंगाल के अपेक्षाकृत शांत,सुंदर शहर खड़गपुर के प्रकृति से परिपूर्ण रेल- उद्यान से मिली जहाँ मैं प्रायः बैठा करता था। आगे अपनी लक्ष्मीस्वरूपा धर्मपत्नी शकुन्तला,परिवार,आसपास के परिवेश एवं समसामयिक घटनाओं से भी प्रेरित हुआ ।

अंततः मेरा मानना है कि आमजन की बोलचाल की भाषा में लिखी सहज संप्रेषणीय कविताएं एवं कहानियां जनमानस की समझ में सरलता से आ जाती हैं ।जनभाषा में रचना मेरी आदत-सी बन गई है । मेरे इस  प्रयास  की सफलता का निर्णय तो सुधी पाठकगण ही कर सकते हैं।

Hawa Ka Rukh

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