“साक़ी”, किसी जाम के चढ़ने और उतरने की कहानी है,
“साक़ी”, किसी शाम के ढलने और सुबह के निकलने की कहानी है।
“साक़ी” की हर कविता एक-दूसरे से जुड़ी है,
ज्यों लहरें समंदर की बाँहों में मुड़ी हैं।
जब इन्हें क्रम में पढ़ेंगे आप ध्यान से,
तो लगेगा हर नज़्म किसी कहानी क़ी कडी है। #dilenazm
Dil-e-Nazm: Saki Part 1: Ishq Se Jamanat Tak
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