यह काव्य–संग्रह आत्मा और समाज से लेकर प्रेम, अस्तित्व और शून्य तक की यात्राओं का दार्शनिक अन्वेषण है। इसमें मिथक और समकालीन विडंबनाएँ, आंतरिक द्वंद्व और संवेदनाएँ इस तरह गुँथी हैं कि पाठक बाहर से भीतर और भीतर से शून्य तक की यात्रा का साक्षी बनता है।
Aham Brahmasmi
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