‘श्रापित जलपरी’ एक हॉरर और मिस्ट्री पर आधारित कहानी है, जिसमें केवल डर ही नहीं, बल्कि समाज की कड़वी सच्चाइयों को भी दिखाया गया है। यह कहानी एक ऐसे गाँव की है, जहाँ बाहर से सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन अंदर कई रहस्य और अन्याय छिपे होते हैं। इसमें एक स्त्री के साथ हुए अत्याचार, समाज की सोच, और श्राप व बदले की भावना को दर्शाया गया है। कहानी में वास्तविकता और सपना एक साथ चलते हैं, जिससे रहस्य और बढ़ जाता है। यह पुस्तक पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या समाज के पाप कभी खत्म होते हैं या फिर किसी न किसी रूप में वापस लौटते हैं। इसमें डर, भावनाएँ और सस्पेंस का अच्छा संतुलन है, जो पाठकों को अंत तक जोड़े रखता है।
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‘श्रापित जलपरी’ एक हॉरर और मिस्ट्री पर आधारित कहानी है, जिसमें केवल डर ही नहीं, बल्कि समाज की कड़वी सच्चाइयों को भी दिखाया गया है। यह कहानी एक ऐसे गाँव की है, जहाँ बाहर से सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन अंदर कई रहस्य और अन्याय छिपे होते हैं। इसमें एक स्त्री के साथ हुए अत्याचार, समाज की सोच, और श्राप व बदले की भावना को दर्शाया गया है। कहानी में वास्तविकता और सपना एक साथ चलते हैं, जिससे रहस्य और बढ़ जाता है। यह पुस्तक पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या समाज के पाप कभी खत्म होते हैं या फिर किसी न किसी रूप में वापस लौटते हैं। इसमें डर, भावनाएँ और सस्पेंस का अच्छा संतुलन है, जो पाठकों को अंत तक जोड़े रखता है।

