रुद्रा पृथ्वी लोक पर अपनी उस प्रियतमा शक्ति स्वरूपा दक्षिणा से दूर है जो पारलौकिक होते हुए भी हर जन्म में उसके साथ रहने के लिए धरती पर अवतरित होती है। उनका यह दिव्य प्रेम समय, जन्म और लोकों की सीमाओं से परे है। यह प्रेम इतना साधारण नहीं कि बिना परीक्षा के पूर्ण हो जाए। देवलोक के राजा इंद्रदेव और सृष्टि के रचयिता ब्रह्मदेव भी इस प्रेम में हस्तक्षेप करते हैं। प्रेम की भाषा ही इस संसार का एकमात्र सत्य है और रुद्रा तथा दक्षिणा की गाथा उसी दिव्य प्रेम की अभिव्यक्ति है।
Rudradev
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