पुस्तक के बारे में:
समय-समय इंसान का मन पर बीते हुए कल को याद करता रहता है। जड़ों की ओर लौटने की चाहत बहुत जोशीली और कभी-कभी महा प्रभावी होती है। यू.के. के एक व्यवसायिक व्यक्ति का दूसरी पीढ़ी का दीपक नाम का बेटा एक यशस्वी प्रोफेशनल था. एक दिन वह अपनी जड़ों को खोजने की ज़िद पकड़ लेता है। व्यस्त जीवन से दूर रहने के लिए वह हिमालय में ट्रेकिंग हॉलिडे की अनुपम योजना बनाता है। न चाहते हुए भी उसके माता-पिता उसे अकेले भारत की यात्रा करने की अनुमति देते हैं। प्रशांत प्रकृति में पहाड़ों में चलते चलते उस रोगोपचारी असर के कारण उसके जीवन का दृष्टिकोण बदल जाता है। दूसरे ट्रेकर्स साथियों के साथ बातचीत करते करते वह स्थानीय परंपरा और संस्कृति से रूबरू होगया। भारतीयों के संपन्न आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ इस इलाके के समृद्ध ऐतिहासिक संबंधों ने दीपक को हैरान कर दिया। अपनी विरासत के इस महान एहसास ने उसे अंदर तक एकदम हिला दिया। वह इस बात से मंत्रमुग्ध हो गया कि वास्तव में यह इलाका इंसानी सभ्यता का जन्मस्थान था। यहाँ के लोगों की विनम्रता और मेहमाननवाज़ी ने उसे पूर्णरूप प्रभावित कर दिया। उसे ज़िंदगी का मतलब समझ में आ गया। आगे वाली घटनाओं ने तो दीपक और उसके परिवार में ज़िंदगी बदलने वाली सोच ही पैद कर दी।
---
लेखक के बारे में:
कमलेश शारदा ने यू.के. की ब्रैडफोर्ड यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर उपाधि ली और कनाडा जाने से पहले उन्होंने कई जानी-मानी इंडस्ट्रियल कंपनियों में काम किया। तैंतीस साल के शानदार करियर के बाद वे टोरंटो, कनाडा में आकर बस गए। उन्हें पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में अपने पिता श्री जगदीश चंद्र शारदा जी से मिला, जो संस्कृत के एक विद्वान और एक लोकप्रिय अध्यापक थे। कमलेश ने सेवा-निवृत्ति के बाद एक अहम शौक के तौर पर लिखना अपनाया। वह अपने साठ साल से ज़्यादा के अपने लंबे अनुभव को जनता से साझा करना चाहते थे। चार कॉन्टिनेंट्स पर रहने और लोकल कल्चर और ट्रेडिशन को एक्टिवली स्टडी करने के खास मौके क् सहारे उन्होंने अपने लिटरेचर फैंस को अपने अनुभव शेयर करने के लिए इंस्पायर किया। वह इंग्लिश लैंग्वेज में चार प्रकाशित किताबों के जाने-माने लेखक हैं। कमलेश ने कैनेडियन साप्ताहिक “न्यू नवभारत टाइम्स” के लिए कई लेख लिखे हैं। उनकी कहानी CBC की “शॉर्ट स्टोरी कॉम्पिटिशन” में शॉर्ट लिस्ट हुई। वह लोकल स्कारबोरो के साप्ताहिक, “करन हॉल न्यूज़लेटर” के लिए कभी-कभी कंट्रीब्यूट भी करते रहे हैं। “पुण्य भूमि” नामक उनकी हिंदी भाषा में पहली पुस्तक है।
top of page
SKU: RM000237
₹269.00Price
bottom of page

