प्रेम की कला मेरी चौथी पुस्तक है; इस पुस्तक की कविताओं का मूल विषय प्रेम है। मैंने प्रेम के संदर्भ में मन में आ रहें विचारों को कविता रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास मात्र किया है। आशा यही है कि जिंदगी से करें प्यार पुस्तक को पाठको ने जिस तरह अपना प्यार दिया, उसी प्रकार इस कविता पुस्तक को भी दिल में जगह देंगे। इस मौके पर मैं अपने परिवार के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करती हूँ जिनकी शुभकामनाओं से प्रेरित होकर मैंने इस पुस्तक को लिखा है। मैं राजमंगल पब्लिशर्स का शुक्रिया अदा करती हूँ जिन्होंने मेरे मन के विचारो को पुस्तक का रूप दिया है।
--
पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, शिलॉन्ग (Purvottar Hindi Academy, Shilling) से महाराजा कृष्ण जैन स्मृति सम्मान विजेता, गुवाहाटी (असम) से ताल्लुक़ रखने वाली युवा हिन्दी लेखिका जीना शर्मा ख़ुद से चल नहीं सकतीं, उन्हें चलने के लिए दूसरों की मदद की ज़रुरत होती है। लेकिन दिव्यांग होने के बाद भी इन्होंने अपनी क़लम से हौसले का परिचय दिया है। इनकी पहली पुस्तक ‘सुनहरे सपने’ वर्ष २००७ में प्रकाशित हुई थी। इस पुस्तक के लिए इन्हें पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, शिलॉन्ग से महाराजा कृष्ण जैन स्मृति सम्मान मिल चुका है। इनकी दूसरी पुस्तक ‘पहचान’ २०१६ में प्रकाशित हुई थी। वर्ष 2019 में इनकी लिखी पुस्तक 'ज़िन्दगी से करें प्यार' प्रकाशित हुई थी। जीना शर्मा इंदिरा गाँधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) से हिन्दी भाषा में स्नातक की उपाधि हासिल कर चुकी हैं। साथ ही जनसंचार (मासकम्युनिकेशन) में एम.ए (M.A) की शिक्षा भी हासिल कर चुकी हैं और सर्जनात्मक लेखन में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है।

