हर कहानी मुस्कुराहट की कलम से नहीं लिखी जाती है। कुछ किस्सों में एक अधूरी सी मुहब्बत की स्याही होती है। यह कहानी शुरू होती है, मध्यप्रदेश के एक छोटे से शहर ' नर्मदापुरम ' से। फिर रेलवे स्टेशन पर बने एक छोटे से ' मिलन बुक स्टॉल ' से शुरू होती है, राघव और वैदेही की प्रेम कहानी। जो बस एक लंबे इंतज़ार के बाद उसी ' मिलन बुक स्टॉल ' पर आकर ख़त्म हो जाती है। कॉलेज की गालियाँ, हॉस्टल की यादें, प्यार और तन्हाई का दर्द और अधूरी मुहब्बत की ये कहानी बताती है, कि हर बार ज़िंदगी हमें मुहब्बत नहीं देती है, लेकिन ख़ुद से मिलने का रास्ता ज़रूर देती है। ज़िंदगी में हम सभी कभी-न-कभी एक ऐसे मोड़ से गुज़रते ही हैं,जहाँ दिल हाथ थामना चाहता है, लेकिन तकदीर छोड़ देने की ज़िद सिखा देती है। कुछ यादें समय के साथ धुंधली नहीं होती हैं, बल्कि और साफ़ हो जाती हैं। कुछ ख़्वाब ऐसे होते हैं, जिन्हें पाकर नहीं बल्कि महसूस करके उनका मकसद पूरा किया जाता है। सच्चे प्यार और सच्ची दोस्ती को उजागर करती ये कहानी कुछ सुकून, कुछ दर्द और कुछ सवालों के साथ पाठकों के लिए यह संदेश छोड़ जाती है कि ' सिर्फ़ पा लेना ही प्यार नहीं और जो भुलाई जा सके, वह दोस्ती नहीं। '
Author: Shikha Gour
ISBN: 978-9347971402
Pages: 225
Language: Hindi
Size: 5x8
Subject: Indian Writing

