‘मन के पंछी : समय के पार’ काव्य संग्रह अंजना सोलंकी की अस्सी कविताओं का संकलन है । पेशे से प्राध्यापिका किंतु मन से एक जाग्रत भाव की कवयित्री हैं । अन्तर मन से अति संवेदनशील अंजना सोलंकी की कविताएँ उनके जीवन के विविध अनुभवों से उपजी हुई हैं ।कोमल मन की स्मृतियों और अनुभूतियों को उन्होंने कविता के माध्यम से शब्दों में पिरोया हैं ।अंजना के अनुसार मन की अनुभूति के अनेक पर्याय होते हैं और अंजना उन सभी पर्यायों को जीती हैं, उन्हें कविता में सुंदर पंक्तियों में ढालती हैं ।
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राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त की सुपौत्री प्रो. अंजना सोलंकी के मन में बचपन से ही कविता, साहित्य और सृजन के प्रति गहरा अनुराग रहा, जो समय के साथ उनकी जीवन-साधना का अभिन्न अंग बन गया। प्रो. सोलंकी, पूर्व अधिष्ठाता, स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग, गौतमबुध विश्वविधालय, ग्रेटर नॉएडा एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, प्रयुक्त विज्ञान एवं मानविकी विभाग, बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, झाँसी में गणित की प्रोफेसर हैं। शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है। उनके निर्देशन में सात शोधार्थी गणित एवं इंजीनियरिंग के विविध आयामों पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं , उनके अनेक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। साहित्य और तकनीकी शिक्षा के समन्वय की दृष्टि से उन्होंने वर्ष 1989 में बी.आई.ई.टी. की वार्षिक पत्रिका ‘संकल्प’ का बतौर मुख्य संपादक शुभारंभ किया था। उनकी कविताएँ, आलेख और अन्य साहित्यिक रचनाएँ समय-समय पर विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उनकी कविताओं में जीवन की अनुभूतियाँ, संबंधों की ऊष्मा, स्मृतियों की कोमलता, प्रकृति का सौंदर्य और मानवीय संवेदनाओं की गहराई सहज रूप से अभिव्यक्त होती है। संवेदना और चिंतन, तर्क और भाव, विज्ञान और साहित्य इन सभी धाराओं का सुंदर संगम उनकी रचनाशीलता को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
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