आप apni निजी ज़िन्दगी में या अपने कार्यस्थल पर किसी भी कार्यों या कर्मों को किस प्रकार करें? यह यक्षप्रश्न आपके मनोमस्तिष्क को सदैव झंकृत करता होगा। आप कार्य करने के लिए अपने वातावरण का निर्माण खुद करें। यह भी ध्यान रखें कि कार्य करने का वातावरण मात्र समाज के कल्याण वास्ते हो। मेरे ‘ग्यारह अध्यायों’ वाली पुस्तकों की श्रेणी मे सुविज्ञ पाठकों के मर्म-स्पर्शन हेतु यह दूसरी पुस्तक है जिसे विद्वान पाठकों को समर्पित कर मुझे हर्ष का अनुभव हो रहा है।
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श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार के ई.एस.आई.सी (ESIC - कर्मचारी राज्य बीमा निगम) में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत, वरिष्ठ हिन्दी लेखक गंवरू प्रमोद (प्रमोद कुमार) पटना, बिहार से ताल्लुक रखते हैं। प्रमोद जी विशेष तौर पर समसामयिक विषयों पर लेख लिखते रहते हैं। कविता एवं कहानी लेखन में भी इनका विशेष योगदान रहा है। प्रमोद जी किसी कार्य को समय सीमा के अंदर कैसे सम्पन्न किया जाए, ऐसे विषयों पर लोगों को सलाह भी देते हैं। प्रमोद जी एक प्रेरक वक्ता के तौर पर पहचाने जाते हैं।

