'कलाकार की मौत' नामक इस काव्य संग्रह में जिज्ञासु जी ने अपनी कुल बत्तीस कविताओं को स्थान दिया है। एक दो कविताओं को यदि छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी कविताएँ गद्यात्मक रूप से मुक्त छंद में लिखी गई हैं। प्रत्येक कविता किसी न किसी भाव-बोध को जीवंत करती हुई समकालीन समाज व सामाजिक जीवन के प्रति एक नूतन दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। विषयगत विविधताओं की बात करें तो बहुत कम ही रचनाकार ऐसे होते हैं जो एक ही पुस्तक में इतने सारे भावों को संकलित करने का साहस दिखा पाते हैं। छायावाद से लेकर प्रयोगवाद व प्रगतिवाद तथा आधुनिक समकालीन हिंदी काव्य की तमाम प्रवृतियों का सामूहिक नमूना इस काव्य संकलन में एक साथ दृष्टिगोचर होता है।
Kalaakar Ki Maut
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