ज्योतिष को अक्सर केवल भविष्य जानने की विद्या के रूप में देखा जाता है, जबकि उसका इतिहास इससे कहीं अधिक व्यापक और जटिल है। आकाश का निरीक्षण, समय की गणना, ग्रहों और नक्षत्रों की गति का अध्ययन तथा मानव जीवन और ब्रह्मांड के बीच संबंध को समझने का प्रयास—इन सभी ने मिलकर ज्योतिष की दीर्घ परंपरा को आकार दिया।
‘गगन के पार : ज्योतिष का विस्मृत इतिहास’ ज्योतिष की इसी ऐतिहासिक यात्रा को उसके व्यापक बौद्धिक और सांस्कृतिक संदर्भ में समझने का प्रयास है। पुस्तक में वैदिक काल से लेकर वेदांग ज्योतिष, सिद्धांत ज्योतिष, होरा और संहिता परंपरा तक के विकास का अध्ययन किया गया है। इसके साथ ही नक्षत्र, पंचांग, कालगणना, अंक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र और हस्तरेखा जैसी परंपराओं के इतिहास और विकास पर भी प्रकाश डाला गया है।
यह पुस्तक ज्योतिष को केवल विश्वास या भविष्यवाणी की दृष्टि से नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा के एक ऐतिहासिक और बौद्धिक अध्याय के रूप में देखने का आमंत्रण देती है।
---
लेखक परिचय: श्री कल्प (निपुल सी. सोजीत्रा) भारतीय ज्योतिष और उससे जुड़ी प्राचीन ज्ञान-परंपराओं के इतिहास, विकास और सांस्कृतिक संदर्भों में रुचि रखने वाले लेखक हैं। उनकी लेखन-दृष्टि परंपरा और इतिहास के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है। ‘गगन के पार’ उनके इसी अध्ययन और जिज्ञासा का परिणाम है।

