यह पुस्तक भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित विविध कहानियों का एक संग्रह है, जिनमें से हर कहानी हमारी संस्कृति, परंपराओं और आधुनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है। इन कहानियों के माध्यम से पाठक भारतीय समाज के जीवंत स्वरूप को देख पाएंगे और यहाँ के लोगों, उनके संघर्षों, उनकी आकांक्षाओं और प्राचीन परंपराओं व आधुनिक चुनौतियों के अनोखे मेल को समझ सकेंगे।
इनमें से कुछ कहानियाँ पहले अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थीं। लेकिन चूंकि ये कहानियाँ भारत के जीवन और समस्याओं को दर्शाती हैं, इसलिए मुझे लगा कि हिंदी में इनका प्रभाव ज्यादा गहरा होगा, और इसी सोच के साथ यह पुस्तक तैयार की गई है। इस पुस्तक में कई विषयों को शामिल किया गया है, जैसे: पारिवारिक संबंध, सामाजिक दबाव, प्रेम और रिश्ते, अपनी पहचान की खोज और परंपरा और आधुनिकता के बीच का तालमेल। इनमें से चार कहानियों के मुख्य पात्र का नाम एक ही है — माघूराम। वह एक दबा-कुचला (underdog) पात्र है जो आम संघर्षों और समस्याओं से जूझ रहा है। मनोरंजन और आनंद के लिए पुस्तक में कुछ हल्की-फुल्की कहानियाँ भी दी गई हैं।
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एयर कमोडोर मनमोहन सिंह दुग्गल (रिटायर्ड), जिन्हें मनु दुग्गल के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म विभाजन के कठिन समय के दौरान रावलपिंडी में हुआ था। अगस्त 1947 में उनका परिवार अपना सब कुछ पीछे छोड़कर दिल्ली आ गया। संसाधनों की कमी के बावजूद, उन्होंने मज़बूत इरादों के साथ जीवन में संघर्ष किया और आगे बढ़े। उनकी स्कूली शिक्षा दिल्ली के एक सरकारी स्कूल से हुई। मात्र 16 साल की उम्र में वे वायु सेना कैडेट के रूप में 'राष्ट्रीय रक्षा अकादमी' (NDA) में शामिल हुए और 1968 में भारतीय वायु सेना में अधिकारी बने। साल 2002 में रिटायर होने से पहले उन्होंने वायु सेना में 34 वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं। नौकरी के दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और मास्टर डिग्री और MBA पूरा किया। उन्होंने शुरुआत में कभी-कभार लेख और कहानियाँ लिखना शुरू किया था, जो बाद में एक गंभीर लेखन के रूप में बदल गया। उन्होंने अपने सैन्य जीवन के दिलचस्प किस्सों पर एक आत्मकथात्मक किताब (Anecdotam – An Ordinary Life) भी लिखी है। समाज के दुखों और समस्याओं को गहराई से समझने के अपने जुनून के कारण उन्होंने 'डाई फॉर अ डे एंड अदर स्टोरीज़' (Die for a Day and Other Stories) लिखी। अब मध्यम आकार की कहानियों की एक नई पुस्तक प्रस्तुत है। इसका शीर्षक है ‘‘एक दिन का स्वर्ग और अन्य सामाजिक कहानियाँ’’I प्रत्येक कहानी एक अलग अध्याय है। ये कहानियाँ विभिन्न रूपों में भारतीय जीवन का वर्णन करती हैं। इसलिए, इनका लक्षित पाठक वर्ग 15 से 100 वर्ष की आयु के भारतीय और भारतीय मूल के व्यक्ति हैंI

