अपराजेय अर्थात् जिसे हराया न जा सके, जिसका दमन करना कठिन हो और जो अत्यधिक साहसी हो, ऐसे व्यक्ति को ‘दुर्धर्ष’ कहा जाता है। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी परीक्षा स्वयं नियति निर्धारित करती है। ’राघव’ इस कहानी का एक ऐसा ही पात्र है। उसका जीवन प्रेरणा स्रोत है। नियमित रूप से उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। साहस के साथ उसने सभी बाधाओं का सामना किया। मानसिक एवं शारीरिक कष्टों को झेलते-झेलते वह इनका अभ्यस्त हो चुका था। असफलताएँ, संघर्ष और दुःख उसका पीछा छोड़ने को तैयार ही नहीं थे। दूसरी तरफ राघव भी उनसे मुख मोड़ने या फिर हार मानने को तैयार नहीं था। संघर्ष और चुनौतियों के विरुद्ध वह अनवरत युद्ध करता रहा।
Durdharsh
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