हॉस्टल के लड़के देखने का मन करे तो हिमालय चले जाना । वहाँ इन पत्थरों का सीना चीरकर निकलती बेख़ौफ़,अल्हड़, जवान होती नदियों को देख लेना । पहाड़ों पर अमिट निशान मिलेंगे, जो इनकी छलकती ऊर्जा की रचना और विध्वंस के इतिहास हैं । बेख़ौफ़ परिंदे उपन्यास इन नदियों जैसे लड़कों की उन कहानियों को समेटे हुए है, जो महसूस की जा सकती हैं ।
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प्रीतम सिंह फ़ौजी पिता और कृषक माता के घर राजस्थान के राठ क्षेत्र के बहरोड़ में जन्में हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक और इतिहास में स्नातकोत्तर किया है। इतिहास विषय के प्रति अपने लगाव को शब्दों का रूप देते हुए एक पुस्तक “उत्तर–पश्चिमी सीमांत:सभ्यता का प्रहरी” लिखने का कार्य भी किया है। अपनी स्कूली शिक्षा से लेकर स्नातकोत्तर और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के समय विभिन्न छात्रावासों में लगभग एक दशक रहने के दौरान जो अलग–अलग व्यक्तित्व और घटनाएँ देखने को मिली, उन्हें लिखने से रोकना इन्हें ख़ुद के साथ ज़्यादती लग रहा था। ये ‘प्रीत’ के नाम से कविता और शेर-ओ-शायरी भी लिखते हैं। ये वर्तमान में सहायक आयुक्त, राज्य कर के पद पर वाणिज्य कर विभाग, राजस्थान में पदस्थापित है।

