इस दौर का बेहतरीन आर्टिस्ट अली हसनैन अपने अगले मास्टर पीस की तलाश में भटक रहा है। अली का मानना है कला पहले से ही मौजूद है, कलाकार बाहरी आवरण हटा कर उसे दुनिया के सामने लाता है। यह तलाश उसे एक वीरान पड़ी इमारत अल रुबीना तक ले आती है। अली महसूस करता है कि अल-रुबीना सिर्फ एक वीरान इमारत नहीं है, बल्कि ये वो कहानी है जो उसकी पेंटिंग के जरिए बाहर आना चाहती है। अल-रुबीना के खँड़हर में भटकते हुए अली अपना मास्टर पीस पेंट कर खुद खो गया। अली की पेंटिंग डिकोड करती दीपा सारंगी और उसे ढूँढता इंस्पेक्टर अजय बेडेकर- दोनों के कदम अल- रुबीना तक पहुंचे तो जरूर पर अली तक पहुँचने का रास्ता दोनों का अलग है। प्रकृति कुछ भी अपने अंदर दबा- छुपा कर नहीं रखती, सबकुछ उगल देती है। अल-रुबीना भी अपने अंदर दो सौ साल से दबे एक सच को बाहर फेंक देना चाहती है। ये सच ही अली का मास्टर पीस है, दीपा की मुक्ति है और अजय की क्लोज़िंग।
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मोहनी भोज एक स्वतंत्र लेखिका और क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं। पत्रकारिता, साहित्य और रंगमंच से लेकर फ़िल्म और टेलीविज़न तक उन्होंने अपनी रचनात्मकता का विस्तार किया है। उनकी पहचान विशेष रूप से crime और fantasy लेखन में है। उनकी डॉक्यूमेंट्री "Man of Collection" को मुंबई इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में प्रदर्शित हुई और सराही गई। यह पुस्तक उनकी रचनात्मक यात्रा का अगला अध्याय है—जहाँ कला-इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम है।
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