"आज़माइश – जज़्बातों की" जीवन के छोटे-बड़े पलों का काव्य संग्रह है, जो हर इंसान कभी न कभी जीता है। इन पन्नों में बचपन की मासूमियत है, परिवार की गर्माहट है, सपनों की उड़ान है, रिश्तों की गहराई है, प्रकृति का सुकून है, प्रेम है, अध्यात्म है, समाज से जुड़े प्रश्न हैं और सबसे बढ़कर हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का विश्वास है। सरल भाषा और सहज भावों में लिखी गई ये कविताएँ पाठक को रुककर जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का निमंत्रण देती हैं। हर कविता कोई कहानी नहीं सुनाती, बल्कि एक अनुभव जगा जाती है। यदि आपको ऐसे शब्द पसंद हैं जो केवल पढ़े नहीं, बल्कि लंबे समय तक आपके साथ चलें, तो "आज़माइश – जज़्बातों की" आपके लिए है। क्योंकि जीवन केवल भावनाओं की नुमाइश नहीं… उन्हें समझने की आज़माइश भी है। सलिल बहल मानते हैं कि सबसे अच्छी कहानियाँ जीवन स्वयं लिखता है। उनकी रचनाएँ कल्पना से कम और अनुभवों से अधिक जन्म लेती हैं। सरल शब्दों में गहरे विचार प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है। 'आज़माइश – जज़्बातों की', उनकी पहली पुस्तक 'नुमाइश – जज़्बातों की' के बाद इस भावनात्मक सफ़र का अगला पड़ाव है।
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