महाभारत के युद्ध का वह तेरहवाँ दिन, जब अकेले अभिमन्यु ने अपने पिता की प्रतिज्ञा और माता के स्वप्न को बचाने के लिए चक्रव्यूह के सात दरवाज़ों को चुनौती दी। यह सिर्फ़ एक युद्धगाथा नहीं, बल्कि अधूरे ज्ञान और अपार साहस के द्वंद्व की मार्मिक कहानी है — जो आधुनिक जीवन की निष्ठा और मर्यादा को महाकाव्य के दर्पण में पुनर्परिभाषित करती है।
Terahvan Din: Abhimanyu Aur Chakravyuh
SKU: RM000119
₹199.00Price

